ओशो का रशिया के नाम संदेश


भारत के पररष्ट् मंत्री इस समय रशिया के दौरे पर गए हुए है। भारत और रशिया के संबंध आज भी मजबूत है।
जब गोरबोचेव सोवियत यूनियन में खुलापन और स्वतंत्रता लाने की बात कर रहे थे उस समय ओशो ने अपने प्रवाचनों में गोर्बाचोव को इस बात से चेताया था कि सोवियत राशियां में पिछले सत्तर वर्षों में लोगों को जिस प्रकार के जीवन शैली में रहना पड़ा था, उसमे भले ही वे कष्ट और अभाव का जीवन जिया लेकिन लोगों में एक मासूमियत है। जो पश्चिम के लोगों में खो गाई है। इसलिए सोवियत संघ के लोगों को अचानक से सारी दुनिया के सामने एक्सपोज कर देना उनके लिए हितकर नहीं सिद्ध होगा। उन्हे पहले इस बात के लिए तैयार किया जाए। ओशो ने उन्हे यह भी कहा था की सोवियत संघ के लोगों की मासूमियत के कारण वे धर्म में अच्छी गती कर सकेंगे, इसलिए उन्होंने अपने संन्यासियों को ध्यान सिखाने के लिए राशियां भेजने का भी प्रस्ताव दिया। 
आज हम ओशो ने जताई हुई आशंकाओं को प्रकट होता हुआ देख रहे है। जो पहले एक ही संयुक्त राष्ट्र था, उसके अलग अलग भागों में बांट कर उन्हे आपस में लड़ाया जा रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

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